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भगौडा शराब कारोबारी विजय माल्‍या लंदन में गिरफ्ताार, 5 मिनट में हुई जमानत

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ब्‍यूरो

भगोड़े भारतीय शराब कारोबारी विजय माल्या को मंगलवार (3 अक्टूबर) को लंदन में धन शोधन के एक मामले में गिरफ्तार कर लिया गया. यह कार्रवाई प्रवर्तन निदेशालय की अपील पर हुई है. लेकिन पांच मिनट में ही उन्‍हें जमानत मिल गई।  विजय माल्या पर 17 भारतीय बैंकों का 9000 करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज है. इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की एक टीम भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या के खिलाफ आरोप-पत्र जमा करने के लिए लंदन पहुंची थी. यह कदम माल्या के प्रत्यर्पण को लेकर उठाया गया था. ईडी टीम लंदन में विजय माल्या के खिलाफ क्राउन प्रोसीक्यूशन कार्यालय के समक्ष 5,500 पृष्ठ के आरोप-पत्र व कुछ अन्य दस्तावेज जमा करने के लिए पहुंची थी. क्राउन प्रोसीक्यूशन कार्यालय माल्या के प्रत्यर्पण के मामले को लड़ रहा है. ईडी अधिकारी ने कहा था कि आरोप पत्र में इस बात का विवरण है कि कैसे माल्या ने आईडीबीआई बैंक से प्राप्त 900 करोड़ रुपये कर्ज की राशि को भारत के अपने समूह की कंपनियों और कई दूसरे देशों में फर्जी कंपनियों के माध्यम से इस्तेमाल किया.

इससे पहले  बैंकों का कर्ज न चुकाने के आरोप में भारत में वांछित भगोड़े कारोबारी विजय माल्या को बीते 18 अप्रैल को लंदन में गिरफ्तार किया गया था, हालांकि कुछ ही घंटों बाद एक स्थानीय अदालत ने उन्हें जमानत मिल गई थी. लंदन की महानगर पुलिस ने बताया कि 61 वर्षीय माल्या को मध्य लंदन के एक पुलिस थाने ले जाया गया, जहां उन्हें हिरासत में ले लिया गया था. हालांकि वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट की अदालत ने माल्या को 650,000 पाउंड के मुचलके पर जमानत दे दी थी. मेट्रोपोलिटन पुलिस ने एक बयान में कहा था कि प्रत्यर्पण विभाग के अधिकारियों ने भारत से प्रत्यर्पण वारंट मिलने के बाद माल्या को हिरासत में लिया था.

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भारत की अदालत ने माल्या को घोषित किया है भगोड़ा

इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बुधवार (14 जून) को मुंबई के एक विशेष अदालत में, बंद कंपनी किंगफिशर एयरलाइंस द्वारा आईडीबीआई बैंक के 900 करोड़ रुपये के कर्ज को नहीं चुकाने के मामले में भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या और अन्य के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया था. ईडी ने 57 पृष्ठों के आरोप पत्र में उन तरीकों का विस्तृत उल्लेख किया है, जिसके जरिए कर्ज को मंजूरी दी गई और उसके बाद नियमों को तोड़ते हुए उस धन को अलग-अलग जगह भेज दिया गया (धन शोधन). साल 2016 के मार्च में ईडी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्डरिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत आईडीबीआई कर्ज के मामले में किंगफिशर एयरलाइंस के खिलाफ मामला दर्ज किया था.

ईडी के मुताबिक, साल 2009 के अक्टूबर में आईडीबीआई बैंक ने किंगफिशर एयरलाइंस को बिना किसी जमानत के 150 करोड़ रुपये का अल्पकालिक कर्ज दिया था, इसके बाद फिर से 750 करोड़ रुपये का कर्ज दिया गया, जिसमें 200 करोड़ रुपये का ब्रिज लोन भी शामिल था. इसमें मानदंडों और प्रक्रियाओं का उल्लंघन किया गया. इस आरोप पत्र से माल्या के खिलाफ ब्रिटेन में भारत सरकार के प्रत्यार्पण मामले को मजबूती मिलने की उम्मीद है. माल्या की कंपनी ने 17 बैंकों के समूह से कुल 9,000 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था. इस कर्ज को नहीं चुकाने के मामले की जांच ईडी और केंद्रीय जांच ब्यूरो कर रहे हैं. मुंबई की विशेष अदालत ने माल्या को भगोड़ा करार दिया है. वह साल 2016 के मार्च में फरार हो गया था और तबसे ब्रिटेन में रह रहा है.

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